सावन घन सघन गरज से,
चपला की धवल कड़क से,
मैं मुदितों को किलकार सुनाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
बिखरे मोती मन लड़ियों के,
ह्रदय पटल सूना पाकर मैं
स्वप्न कली से हार सजाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
सुमन खिला मन उपवन में
मधुकर प्रेमी को सरसा कर
मैं मधुकर को मधुपान कराने आया
मैं प्यार जगाने आया।
तप्त और संतृप्त रहे हम
तब आजादी का मुख देखा
मैं वीरों का आभार सुनाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
आंधी वर्षा तूफानों में
भटके भवसागर पथ पर लख
मैं नाविक को पतवार दिलाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
जन्मा हम को इस आँचल में
माँ वसुंधरा ने बड़ा किया,
मैं भारतमाता से प्यार बढ़ाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
जीवन की क्रंदन घड़ियों में
मन टिक टिक करता विह्वल हो,
मैं सूने सागर में लहर जगाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
क्षत-विक्षत मानस त्रन भटके,
हर पग पर दुःख दर्द भरा है,
मैं दुखितो का संसार बसाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
ओ ! लहर ठहर करने वाले,
कभी न रुक इस क्रीडा से तू,
मैं, 'तीन रंग की ध्वजा' तेरा सत्कार बढ़ाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
"सत्यम शिवम् सुन्दरम" के प्रतीक!
कहाँ है तेरा आदि अंत
मैं भावों का उदगार बहाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
महाराणा प्रताप शिवाजी
रनधारी प्रचंड शक्ति से
मैं हिंसा का प्रतिकार सुनाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर
आहुतियों की ज्वाला से, मैं भारत-यौवन का
श्रृंगार सजाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
शक्ति स्वरूपा रानी झाँसी,
सती गौरवी वीरभद्रा जैसी,
सतियों का सत्कार बढ़ाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
भीषम, धनुर्धर अर्जुन प्रचंड बली के
कर्म काण्ड के योग ज्ञान से
मैं हंसो का आहार सुनाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
युग पुरुषों के आदर्शो में
क्षमा ज्ञान का ध्यान लिए मैं
पापों का प्रतिहार सुनाने आया,
मैं प्यार जगाने आया।
सत्य निष्ठ के सबल कर्म में
मन मयूर की वाणी लाकर,
मेघों का रव् घोर सुनाने आया
मैं प्यार जगाने आया।
स्वतंत्रता की युद्ध कलो से
हँसी खेल का आभासी मैं
रन भेरी की गूँज सुनाने आया,
मै प्यार जगाने आया।
वीरगति के सेनानियों
तुम मर कर सदा अमर रहना
मै यादों का संसार बसाने आया
मैं प्यार जगाने आया।
नई संतति! ध्यान रहे बस,
गौरव का अनुमान रहे बस
मै गौरव की झंकार बजाने आया
मैं प्यार जगाने आया।
"दीन हीन निवलो विकलो के
सेवक बन संताप हरें "
मैं सेवा का आधार दिखाने आया
मैं प्यार जगाने आया।
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